Smartphone BAN Revoke : बवाल के बाद महिलाओं के स्मार्टफोन इस्तेमाल पर रोक वाला निर्णय लिया वापिस

Smartphone BAN Revoke : राजस्थान के जालोर में हुई पंचायत में लिए गए फैसले को विवादों के बाद वापिस ले लिया गया है । रविवार को जालोर में हुई सुंधा माता पट्टी की पंचायत में फैसला लिया गया था कि आसपास के 24 गांवो की महिलाएं, छात्राएं स्मार्टफोन का इस्तेमाल नहीं करेंगी । सोशल मीडिया पर ये खबर वायरल होने के बाद अब पंचायत ने इस फैसले को वापिस ले लिया है ।
फैसला क्यों लेना पड़ा वापिस ?
दरअसल राजस्थान के जालोर इलाके में सुंधा माता पट्टी की रविवार को एक पंचायत हुई जिसमें प्रस्ताव रखा गया कि महिलाओं और बच्चों को मोबाइल की लत छुड़वाने के लिए उनके स्मार्टफोन का इस्तेमाल करने पर रोक लगा दी गई थी । पंचायत के इस फैसले को 26 जनवरी 2026 से लागू किया जाना था ।

पंचायत के इस तुगलकी फरमान का एलान होते ही ये खबर सोशल मीडिया पर लगातार वायरल होने लगी जिसके बाद अब पंचायत के सदस्यों ने एलान किया है कि ये फैसला नहीं था बल्कि पंचायत में महिलाओं द्वारा दिया गया एक प्रस्ताव था । इसको लागू नहीं किया जाएगा ।
पंचायत के पंच पटेल का कहना है कि ये केवल एक प्रस्ताव था इसका मकसद था कि महिलाओं और बच्चों को मोबाइल फोन के दुष्प्रभाव से बचाना और साइबर ठगी से बचाना । पंच पटेल ने कहा कि स्मार्टफोन की लत की वजह से बच्चों पर बुरा असर पड़ रहा था । गेमिंग के साथ साथ सोशल मीडिया पर आने वाली अश्लील सामग्री की वजह से सामाजिक ताना बाना बिगड़ रहा था । इसीलिए ये प्रस्ताव लाया गया था ।

बच्चे पढाई में कम और गेमिंग ज्यादा रहते हैं मगन !
उन्होंने बताया कि आजकल स्मार्टफोन की वजह से बच्चे अधिक गेम खेल रहे हैं. भोजन खाने में भी आनाकानी करते हैं. स्कूल से घर आने के बाद होमवर्क नहीं करते, केवल मोबाइल लेकर बैठ जाते हैं. बच्चों को इतना ज्ञान नहीं होता, इसलिए कई बार साइबर ठगी के मामलों में भी नुकसान का सामना करना पड़ता है. पांच पटेलन ने स्पष्ट किया, “ऐसा नहीं है कि महिलाओं और बेटियों को मोबाइल बिल्कुल बंद करने के लिए कहा गया था. आज के जमाने में पढ़ाई करने वाली बच्चियों को मोबाइल रखना जरूरी होगा तो वह अपने घर में ही मोबाइल से पढ़ाई कर सकती हैं. पढ़ाई के लिए जरूर उपयोग कर सकती हैं, जिससे उनकी पढ़ाई में किसी भी प्रकार की बाधा उत्पन्न नहीं हो ।
पूरी तरह वापिस लिया प्रस्ताव !
लेकिन अब इस पूरे मामले को लेकर समाज के पांच पटेलन ने बैठक बुलाकर इस निर्णय को वापस ले लिया है । समाज के समक्ष रखे गए इस सुझाव और प्रस्ताव को पूरी तरह से वापस ले लिया गया है । उन्होंने कहा कि समाज के समक्ष केवल प्रस्ताव रखा गया था, लेकिन उसको अब वापस ले लिया गया है । यह केवल समाज हित के लिए सुझाव और प्रस्ताव था, न कि कोई निर्णय था ।










